Brian Power

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Brian Power क्या आपको पता है, आपके Brian में ऐसी शक्तिया होती है. जिससे आप कुछ भी कर सकते है. जैसे की हवा में उड़ना एक जगह से दूसरी जगह पर Teleport हो जाना। ऐसे काम हमारे Brian के लिए बहुत ही आसान काम है,

क्यों की इंसानी शरीर इसी चीजों के लिए बनाया गया है. अगर इंसान जो भी चाहे वह कर सकता है.Brian एक ऐसी शक्ति है, जिससे हम कुछ भी कर सकते है.

हम इंसानो ने इस धरती पर कुछ ऐसे कारनामे किये है, जो दुनिया कोई भी प्राणी नहीं कर सकता।

हमारे Brian के शक्ति से हमने ऐसा कुछ कर दिखाया है की जो चीजें नामुनकिन लगती थी.

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वह अब मुनकिन हो गए है. लेकिन इस Article में हम बात करने वाले है. Astrology के बारे में,

आपको पता है, क्या हमारे Astrology यानि के ज्योतिष शास्त्र में Brian को इतना ज्यादा महत्व दिया है.

हम उसके बारे में सोच भी नहीं सकते। Astrology में हमारे Brian का कुछ इस तरह से वर्णन किया है,

जो हमारे सोच से भी परे है. आये जानते है, की ज्योतिष शास्त्र क्या कहते है. हमारे Brian के बारे में

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर में 42 शक्ति केंद्र होते है. जिसे जागृत करके इंसान कुछ भी कर सकता है, लेकिन इसे जागृत करने के लिए इंसान को बहुत ही कंसन्ट्रेशन की जरूरत होती है. लेकिन इस केवल कुंडली जागृती के बाद ही इसे जागृत कर सकते है.

हमारे Brian की सोच और समज, अनुभव की प्राप्ति और भी कई सारे अनुभूति हमें इस 42 शक्ति से ही मिलती है.

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इस केंद्र की वजह से हमारे शरीर का संतुलन बना रहता है. यह 42 शक्ति केंद्र हमारे प्रकृति, प्रवृति, वैचारिक अभिरुवति, सेक्स, क्रोध, इ. भावना control करता है और जरुरत पड़ने पर यह कम ज्यादा भी करता है. चलिए जानते है की यह Brian के किस हिसे में यह किस तरह का काम करता है.

इंसानी दिमाग में ज्योतिष शास्त्र में यानि के Astrology 42 हिस्से किये है.

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1 हिस्से के बारे में जानते है की हमारे Brian का पहिला हिस्सा कीस शक्ति को जागृत करता है. इंसान के पाहिले Brian के हिस्से में कामोच्छा होती है,

2 हिस्स मे विवाह के बारे में भावना होती है.

3 भाग में यानि के हिस्स मे वास्ल्य, करुणा, प्रेम, होता है.

4 हिस्से में दोस्ती और शत्रुता होती है.

5 भाग में देश प्रेम होता है. जैसे की (स्थान के प्रति व्यक्ति के प्रति)

6 वे भाग में ध्यानपूर्वक समर्पण।

7 भाग में अभिलाषा, और 8 भाग में दृढ़ता होती है और 9 हिस्से में व्यक्ति के प्रति सूड़भावना होती है.

10. भाग में स्वाद यानि के अन्न के चखने की प्रवति होती है.

 11. भाग में धन के प्रति लगाव होता है.

12. भाग में गुप्त कला की प्रवृति होती है.

13. भाग में दूरदर्शी की कला होती है.

14. भाग में अभिमान।

15. भाग में स्वाभिमान की प्रवृति होती है.

16. भाग में धैर्य।

17. भाग में न्याय प्रियता होती है.

18. भाग में आशा, विश्वास होता है.

19 भाग में धार्मिकता और आत्मिकबल है.

20 भाग में दया और सहानभूति होती है और बाकि के 21 भागो में सूक्ष भावनाएं होती है.

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