New Currency in Africa

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New Currency in Africa

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आज हम बात करने वाले हैं अफ्रीका की नई करेंसी इको के बारे में उससे पहले अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो अपने फ्रेंड एंड फैमिली में जरूर शेयर कर दीजिए.

शुरुआत करते हैं अफ्रीका की नई करेंसी को के बारे में आखिरकार क्यों अफ्रीका अपनी नई करेंसी लांच करने जा रहा है.

क्योंकि अफ्रीका की करेंसी अभी तक स्टेबल है. यह सब कुछ जानेंगे इस आर्टिकल में और शुरुआत करते हैं लेकिन इससे पहले अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो इसे अपने फ्रेंड एंड फैमिली में जरूर शेयर कर दीजिए.

अफ्रीका के लगभग 15 देशों ने अपनी करंसी बदलने का निर्णय ले रही है आखिर कर क्यों Africa के 15 देश अपनी करेंसी बदलने वाले हैं . और अपने कंट्री में स्टेबल करंसी लॉन्च करने वाले हैं.

इन सब चीजों का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा अफ्रीका मैं इसका क्या असर पड़ेगा.

आप वैसे भी जानते हैं कि आप ही का के लगभग चार Part पढ़ते हैं. एक East अफ्रीका, एक  North अफ्रीका, एक  West अफ्रीका और एक South अफ्रीका.

जो वेस्ट अफ्रीका के 15 देश है उन्होंने मैं 2020 तक अपनी करेंसी चेंज करने  का  निर्णय ले लिया है.

अफ्रीका के लगभग 15 देश अपने कंट्री में एक सिंगल करंसी अडॉप्ट करने वाली है कुछ हद तक यूरोप की यूरो की तरह होगी अफ्रीका के 15 देश यह पार्ट है ECOWAS का इस का फुल फॉर्म है Economic Community of West Africa State.

यहां पर इमेज में हाइलाइट किया हुआ एरिया इन कंट्री के पार दर्शाता है जो अपनी करंसी चेंज करने वाले हैं इस देश के नाम क्या है.

1Benin

2.Burkina Faso

3.Cape Verde

4.The Gambia

5.Ghana

6.Guinea

7.Guinea-Bissau

8.Ivory Coast

9.Liberia

10Mali

11.Niger

12.Nigeria

13.Senegal

14.Sierra Leone

15.Togo

सभी देश अपनी currency चेंज कर कर वहां पर Stable करेंसी अपनाने वाले हैं जो कि उनके लिए काफी हद तक इकोनामिक ग्रोथ करने के लिए लाभदायक है.

15 कंट्री का एक ग्रुप है जिसे हम ECOWAS कहते हैं इसका जन्म हुआ था 1975 में

ECOWAS इनिशियल काम है जो लोकल लेवल पर इकोनॉमिक्स रिलेटेड इश्यू है एग्जांपल के लिए कोई ट्रेड Issue टेक्स्ट एक्शन जैसी चीजों पर यह नियंत्रण करता है ऐसी सारी चीजों को सॉल्व करने के लिए ECOWAS की स्थापना की गई थी और यह आज तक काफी अच्छी तरीके से काम कर रहा है.

Africa ke 14 देश है जो CFA की करेंसी यूज  करते हैं यह वह कंट्री है जो आपको इमेज में देख रही है.

आपको इमेज में ग्रीन कलर का जो कंट्री देख रहे हैं वह part है CFA FRANC का और यह सारी कंट्री अपने फॉरेन रिजर्व रखते हैं फ्रांस की सेंट्रल बैंक में आपके मन में एक प्रश्न आता होगा कि यह सारी कंट्री अपनी फॉरेन रिजर्व फ्रांस  के सेंट्रल बैंक में क्यों रखते हैं.

यह है कि 1939 से लेकर 1990 तक फ्रेंच एंपायर अपने पिक परफॉर्मेंस में था.

उसका इंपेयर्स लगभग पूरा अफ्रीका में साउथ अमेरिका में एशियन कंट्री में था इसी वजह से अफ्रीका के लगभग आधी कंट्री आपने फॉरेन रिजर्व अफ्रीका के सेंट्रल बैंक में रहती है इससे अफ्रीका को एक एश्योंरेंस मिलती है. कि उनकी करेंसी कभी भी डाउन नहीं होंगी.

अगर अफ्रीका अपने देश में 1 स्टेबल करेंसी लागू करता है तो इसका असर दुनिया पर क्या पड़ेगा और अफ़्रीका में क्या पड़ेगा लगभग सारी कंट्री यह समझ गई है कि स्टेबल करेंसी होने से इकोनॉमिक्स में ट्रांसफर सी आ जाएंगी इसका बेनिफिट यह है कि अगर किसी व्यापारी को अपना माल किसी अदर कंट्री में बेचना हो तो वह किसी की भी परेशानी के अपना माल अदर कंट्री में बह सकता है और इसमें जो करंसी एक्सचेंज का कॉस्ट होता है वह काफी हद तक स्टेबल हो जाएगा.

और ऐसा करने से अफ्रीका में बिजनेस की ग्रोथ जल्दी शुरू हो  जाएंगी.

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