‘Alpha’ ‘Beta’ सेंटौरी की खोज

अल्फा बीटा सेंचुरी की खोज.

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‘Alpha’, ‘Beta‘ सेंटौरी की खोज.

‘1689’ फादर रिचर्ड ने की; उसके बाद अल्फा बीटा सेंटौरी में काफी रिसर्च किया गए.

हमारे सोलर सिस्टम में से सबसे नजदीक तारका का समूह है.

अल्फा सेंटौरी 

तारका का समूह में ‘3000’ से भी ज्यादा तारे हैं.

अल्फा सेंटौरी  ‘A’

जिसका नाम है “अल्फा सेंटौरी , ‘बीटा सेंटौरी ‘ और ‘प्रॉक्सिमा सेंटौरी “.

बीटा सेंटौरी ‘B’

‘अल्फा’ और ‘बीटा सेंटौरी ‘ को साइंटिस्ट हमेशा ‘A सेंटौरी ‘ और ‘B सेंटौरी ‘ के नाम से संबोधन करते हैं.

प्रॉक्सिमा सेंटौरी ‘C’ की खोज

प्रॉक्सिमा सेंटौरी‘ को ‘सी’ नाम से संबोधित किया जाता है.

‘अल्फा सेंटौरी ‘ की पिंड का आकार सूरज से 10 गुना ज्यादा बड़ा है.

‘बीटा सेंटौरी ‘ का आकार ‘अल्फा सेंटौरी ‘ से थोड़ा सा कम है.

इसी वजह से वह कम ‘उर्जा’ उत्सर्जित करता है.

‘प्रॉक्सिमा सेंटौरी ‘ लगभग छोटे ग्रह के साइज का है.

जो ‘अल्फा और बीटा’ सेंटौरी को ऑर्बिट करता है.

बात की जाए; ‘प्रॉक्सिमा सेंटौरी ‘ की तो; वह हमारे सूर्य के सबसे नजदीक तारका  समूह है.

सूर्य से काफी नजदीक होने से जिसे हम देख सकते हैं.

इन तारामंडल को ‘सेंटौरी सिस्टम‘ भी कहा जाता है.

इस तारामंडल का नाम “सेंटॉरस” रखा गया है.

पृथ्वी से इस तारामंडल का अंतर 4.2 से 4.4 लाइट ईयर है.

हमें अगर उन तक पहुंचना है; तो हमें “न्यूक्लियस प्लस इंजन” की जरूरत है.

जो लाइट ईयर के स्पीड से.

अल्फा सेंटौरी तक पहुंच सके.

वहां पहुंचने के लिए हमें 50 साल लगेंगे.

माना जाता है; कि अल्फा सेंटौरी में काफी ग्रह है.

जहां पर जीवन होने के चांसेस भी हो सकते हैं.

‘अल्फा और बीटा’ सेंटौरी की खोज ‘फादर रिचर्ड’ इसने दिसंबर 1689 की थी.

उसके बाद इस ‘सेंटौरी ‘ का विस्तार से संशोधन चालू किया गया.

संशोधन में पाया गया कि यह जो तारे हैं.

वह हमारे सूरज की तरह ही ‘छह अरब’ पुराने हैं.

जब यह दोनों तारे एक दूसरे के करीब आते हैं.

तो इनका अंतर सूरज और पृथ्वी के समान होता है; और जब यह दूर जाते हैं; तो इनका अंतर सूरज और प्लूटो जितना होता है. Story of Chandrayaan 2 in Hindi पढ़ने के लिए क्लिक कीजिए Download

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अल्फा बीटा सेंचुरी की खोज

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